Tuesday, 11 October 2016

कबीर जी और उनके गुरु की तर्क कहानी

कबीर जी जिनके दोहों में बहुत ही गहरा प्रेरणादायक सार छुपा है, ये वाक्या कबीर जी और उनके गुरु जी के साथ हुआ। इससे हमें सामाजिक प्रथाओं के बारे में ज्ञान होगा, कि कुछ प्रथाओं का महत्व नहीं होता। लेकिन ये पूर्वजों से चली आ रही हैं, इसी कारण हम भी इस तरह की प्रथाओं को मानते है।
एक दिन कबीर जी के गुरु ने कबीर जी से कहा की श्राद आने वाले है, मैं पितरों को भोजन करवाना चाहता हूॅं। तुम जाओ और खाने-पिने की वस्तुओं और दूद्ध का इन्तज़ाम करो। कबीर जी ने अपने गुरु का दिया आदेश माना और तुरन्त चल दिए, रास्ते में एक मरी हुई गांय देखी। कबीर जी ने मरी हुई गांय के सामने हरी घास रख दी और खुद वहां बैठ गए।

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